
सनातन धर्म में Malamas 2026 को बेहद पवित्र और आध्यात्मिक महीना माना जाता है। इस महीने को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दौरान पूजा-पाठ, दान, व्रत और तीर्थ स्नान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य प्राप्त होता है। खासतौर पर बिहार के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल राजगीर में मलमास के दौरान लाखों श्रद्धालु स्नान और दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
राजगीर का मलमास मेला पूरे देश में प्रसिद्ध माना जाता है। यहां के गर्म जल कुंडों में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस समय यहां स्नान करने से मन, शरीर और आत्मा को शुद्धि मिलती है।
Malamas 2026 कब से कब तक रहेगा?
धार्मिक पंचांग के अनुसार Malamas 2026 की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और इसका समापन 15 जून 2026 को माना जा रहा है। इस पूरे एक महीने को पूजा, साधना और भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद खास माना गया है।
राजगीर कब जाना चाहिए?
Malamas 2026 के दौरान राजगीर जाने का सबसे शुभ समय सुबह ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है। विशेष रूप से अमावस्या, पूर्णिमा और एकादशी के दिनों में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
मलमास 2026 की प्रमुख स्नान तिथियां
| तिथि | विशेष महत्व |
|---|---|
| 17 मई 2026 | मलमास प्रारंभ और पहला शुभ स्नान |
| 27 मई 2026 | परमा एकादशी स्नान |
| 31 मई 2026 | पूर्णिमा स्नान |
| 11 जून 2026 | एकादशी स्नान |
| 15 जून 2026 | अमावस्या स्नान और मलमास समापन |
मलमास में राजगीर क्यों जाते हैं?
राजगीर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आस्था और अध्यात्म का बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां मौजूद गर्म जल कुंडों का धार्मिक महत्व हजारों वर्षों से बताया जाता है। मान्यता है कि मलमास के दौरान यहां स्नान करने से कई प्रकार के दोष दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
Malamas 2026 मेले के दौरान यहां भजन-कीर्तन, कथा और पूजा का विशेष आयोजन होता है। पहाड़ों से घिरा राजगीर इस समय पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में बदल जाता है।

राजगीर में कहां स्नान करना चाहिए?
ब्रह्मकुंड
राजगीर का सबसे प्रसिद्ध गर्म जल कुंड ब्रह्मकुंड माना जाता है। यहां का पानी हमेशा गर्म रहता है और श्रद्धालु इसे बेहद पवित्र मानते हैं।
सप्तधारा कुंड
यह स्थान भी धार्मिक दृष्टि से खास माना जाता है। यहां स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

मलमास में क्या करना चाहिए?
इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, गीता पाठ, दान-पुण्य और व्रत रखना शुभ माना गया है। सुबह स्नान के बाद मंदिर दर्शन करना और जरूरतमंद लोगों को भोजन देना विशेष फलदायी माना जाता है।
मलमास में क्या नहीं करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास में शादी-विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य करने से बचा जाता है। यह समय केवल भक्ति और साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
निष्कर्ष
Malamas 2026 का समय आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का विशेष अवसर माना जाएगा। अगर आप राजगीर यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो 17 मई से 15 जून 2026 के बीच स्नान और पूजा का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और शांति लेकर आती है।
FAQ
प्रश्न 1: मलमास 2026 कब से कब तक रहेगा?
उत्तर : Malamas 2026 की शुरुआत 17 मई 2026 से मानी जा रही है और इसका समापन 15 जून 2026 को होगा। इस पूरे समय भगवान विष्णु की पूजा और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व रहेगा।
प्रश्न 2: मलमास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है?
उत्तर : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने अधिक मास को अपना नाम “पुरुषोत्तम मास” दिया था। तभी से इस महीने को बेहद पवित्र माना जाता है।
प्रश्न 3: मलमास में राजगीर क्यों जाते हैं?
उत्तर : राजगीर में मौजूद गर्म जल कुंडों का धार्मिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है। मलमास के दौरान यहां स्नान और पूजा करने से विशेष पुण्य मिलने की मान्यता है।
प्रश्न 4: राजगीर में सबसे प्रसिद्ध स्नान स्थल कौन-सा है?
उत्तर : राजगीर का ब्रह्मकुंड सबसे प्रसिद्ध गर्म जल कुंड माना जाता है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं।
प्रश्न 5: Malamas 2026 में क्या करना चाहिए?
उत्तर : इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, गीता पाठ, दान-पुण्य, व्रत और तीर्थ यात्रा करना शुभ माना गया है।
Disclaimer
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। तिथियों और मान्यताओं में क्षेत्र और पंचांग के अनुसार बदलाव संभव है। किसी भी धार्मिक यात्रा या पूजा से पहले आधिकारिक पंचांग या विद्वान पंडित की सलाह अवश्य लें।
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